मैं नीरज हूँ, मैं इस अखिल-विश्व का छोटा-सा अणु,अपनी ही धुन में रहता हूँ और जो कुछ भी लिखने जैसा मिल जाता है लिख लेता हूँ.शब्द मुझे और मैं शब्दों को बाँधता हूँ,हम दोनों एक-दूसरे के बहुत अच्छे साथी हैं.एक-दूसरे के साथ बहुत-कुछ बांटा है,जिसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है.बस कुछ कहानियाँ हैं,कुछ उपन्यास हैं,कुछ कवितायें है और इन्हीं कुछ में मैं पूरा-पूरा हूँ.....शायद हाँ-शायद न.आप ही कुछ कहें.